अनुसंधान एवं जाँच

 

आयोग को मानवाधिकार  के उल्लंघन के शिकायतों के अनुसंधान करने हेतु महानिरीक्षक रैंक के पुलिस अधिकारी की देख-रेख में एक अपनी अनुसंधान एजेंसी होगी । आयोग केन्द्रीय सरकार अथवा राज्य सरकार के किसी कार्यालय अथवा अनुसंधान एजेंसी का भी उपयोग कर सकता है । वह गैर-सरकारी संगठनों को भी अपने अनुसंधान कार्य में सम्मिलित कर सकता है । आयोग मानवाधिकारों के उल्लंघन की शिकायतों की जाँच-पड़ताल करते समय केन्द्रीय सरकार अथवा राज्य सरकार या उसके अधीनस्थ किसी अन्य प्राधिकार या संगठन से विनिर्दिष्ट समय के भीतर जानकारी अथवा प्रतिवेदन मांग सकता है । यदि विनिर्दिष्ट समय के भीतर जानकारी अथवा प्रतिवेदन प्राप्त न हों तो आयोग स्वयं शिकायत की जाँच-पड़ताल कर सकता है । जानकारी अथवा प्रतिवेदन प्राप्त होने पर यदि आयोग का समाधान हो जाय कि आगे किसी जाँच की अपेक्षा नहीं है अथवा अपेक्षित कार्रवाई संबंधित सरकार या प्राधिकार द्वारा शुरू कर दी गयी है या होनी है तो शिकायत पर आगे की कार्रवाई रोक सकती है । जहाँ जाँच से आयोग को पता चले कि मानवाधिकारों का उल्लंघन हुआ है या लोक सेवक द्वारा मानवाधिकारों के उल्लंघन को रोकने में असफलता या अवहेलना हुई है, वहाँ वह संबंधित सरकार अथवा प्राधिकार को संबंधित व्यक्ति या व्यक्तियों के विरूद्ध अभियोजन की कार्रवाही अथवा ऐसी अन्य कार्रवाई करने के लिए, जिसे आयोग उचित समझे, अनुशंसा कर सकता है । आयोग उच्चतम न्यायालय अथवा उच्च न्यायालय से ऐसा निदेश, आदेश अथवा आज्ञा के लिए आग्रह भी कर सकता है जिसे वह आवश्यक समझे । आयोग संबंधित सरकार अथवा प्राधिकार से पीड़ित अथवा उसके परिवार के सदस्यों को ऐसी राहत देने के लिए, जिसे आयोग आवश्यक समझे, अनुशंसा कर सकता है ।

 

संबंधित सरकार या प्राधिकार यथास्थिति आयोग को प्रतिवेदन या अनुशंसा पर की गयी कार्रवाई की एक माह के भीतर जानकारी देगा ।

 

सामान्यत: आयोग की अधिकारिता राज्य में मानवाधिकारों के उल्लंघन को रोकने में बरती गयी अवहेलना तक जाती है, पर यदि राज्य के बाहर ऐसा उल्लंघन होता है या ऐसे उल्लंघन को रोकने में अवहेलना या असफलता होती है, तो ऐसे मामलों में भी आयोग शिकायत ग्रहण कर सकता है अथवा स्वयं (स्वप्रेरणा से) कार्रवाई आरंभ कर सकता है बशर्ते कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग या संबंधित राज्य के मानवाधिकार आयोग द्वारा (जहाँ उल्लंघन अथवा उल्लंघन को राकने में अवहेलना या असफलता हुई है तो) ऐसे उल्लंघन अथवा उसे रोकने में या असफलता के संबंध में कोई कार्यवाही नहीं की गयी हो ।