परिवाद दर्ज कराने की प्रक्रिया

 

परिवाद हिन्दी अथवा अंग्रेजी भाषा में किया जा सकता है । पर आयोग के स्वनिर्णय से परिवाद अन्य भाषा में भी ग्रहण किया जा सकता है । परिवाद में मानवाधिकारों के उल्लंघन अथवा उल्लंघन को रोकने में हुई अवहेलना या असफलता संगत मूल तथ्यों का तथा आयोग से मांगी गयी राहत का वर्णन होना चाहिए ।

शिकायतकर्ता को कोई फीस नहीं देनी होगी । कोई शपथ-पत्र भी तब तक दायर करना आवश्यक नहीं होगा जब तक समुचित मामले में आयोग वैसा निर्देश न दे ।

शिकायत व्यक्तिगत रूप में दायर की जा सकती है अथवा डाक द्वारा या फैक्स अथवा ई-मेल के माध्यम से sec-bhrc@nic.in के पते पर भेजी जा सकती है ।

उन घटनाओं जो एक वर्ष पहले घटित हुई हों, के संबंध में शिकायत ग्रहण नहीं की जायेगी परन्तु यदि शिकायत आवृति प्रकृति का (recurring) है तो वैसी शिकायतें भी स्वीकार की जा सकती हैं ।

इसके अलावे निम्नलिखित प्रकृति की शिकायतें भी ग्रहण नहीं की जायेगीं -

  • ऐसे मामले जो न्यायालय के विचाराधीन हो

  • अस्पष्ट, बिना नाम के या छद्मनामी शिकायत

  • तुच्छ प्रकृति की शिकायतें

  • संपत्ति विवाद से संबंधित शिकायतें

  • सेवा मामलों से संबंधित शिकायतें ।

शिकायत अथवा परिवाद भेजने के लिए निर्धारित प्रपत्र यहाँ उपलब्ध है । कृपया इसे डाउनलोड करने के लिए दिखलाये गए फार्म पर माउस से क्लिक करें ।